ईमानदारी का अब जमाना नहीं!


प्रियंका ध्यानी
आजकल चर्चा में चल रही दुर्गा शक्ति नागपाल को सस्पेंड कर अखिलेश सरकार ने खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है.

इतने बड़े पद का फैसला उन्होंने चुटकियों में लेकर अपने को पूरी तरह मुसीबत में डाल लिया है.

नाराजगी भले ही किसी और वजह से थी पर अपने काम का खुलासा तो कर नही सकते थे इसलिए कोई दूसरा शस्त्र उठा
कर उन्होने दुर्गा पर हल्ला बोल दिया.

अवैध खनन मामले में उन्होंने दुर्गा से बदला तो ले लिया पर क्या सच में जनता चुप रहेगी.

अवैध खनन अभियान के चलते अखिलेश सरकार का नाराज
होना बात कुछ समझ नही आई.

इस से एक ही बात साफ है कि अखिलेश की पार्टी के किसी करीबी का इस अवैध काम से कुछ तो लेना-देना था.

वरना जिस काम से उन्हें खुश होना चाहिए था उस काम से वो इतना भड़क उठे कि उन्हें सस्पेंड कर दिया.

ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा की भूल दुर्गा के लिए बन गई सजा. देखा जाए तो वह गलत भी नही थी.

सरकारी जमीन को धार्मिक तरीके से हथियाना गलत है. इसलिए ही दुर्गा को इतना बडा कदम उठाना पडा.

पूरा देश दुर्गा का समर्थन कर रहा है, खास कर युवा. उन्हें भी पता चल गया है कि ईमानदारी नेताओं से पचती नही.

जब नेता, मंत्री घोटालों में फंसते है तब तो उन्हें सस्पेंड नही किया जाता.

अब पता चलेगा की ईमानदार लोगो की तरफ अगुंली उठाने से पहले अखिलेश सरकार को देख लेना चाहिए था कि बाकी तीन अंगुलियां उनके अपने ही तरफ है.

-  प्रियंका ध्यानी

No comments: