Yoga: India’s Enduring Soft Power in a Changing World By Nivedita Amoli

In an era marked by rising stress, lifestyle-related diseases, and social divisions, the search for practices that promote health and harmony has become more important than ever. Among the many contributions India has made to the world, yoga stands out as a timeless tradition that continues to unite people across

दिल्ली में लंगट बाबू स्मूति समारोह

नई दिल्ली के गाँधी शांति प्रतिष्ठान में 19 अप्रैल 2015 को बिहार में सामाजिक-शैक्षणिक आन्दोलन के अग्रदूत और उत्तर बिहार के हॉवर्ड माने जाने वाले प्रतिष्ठित लंगट सिंह महाविद्यालय के संस्थापक बाबु लंगट सिंह की स्मृति में “बिहार की वर्तमान शैक्षणिक व्यवस्था की संभावना एवं चुनौतियां” विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य
मंत्री एवं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने किया. बाबू लंगट सिंह को याद करते हुए श्री कुशवाहा ने कहा की सीमित संसाधनों के बावजूद उत्तर बिहार में शिक्षा के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उन्होंने लंगट सिंह कॉलेज की स्थापना की थी, लेकिन आज उसकी स्थिति काफी दयनीय हैं.

श्री कुशवाहा ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था और लंगट सिंह कॉलेज की बदहाली को दूर करने के लिए यथासंभव मदद करने का भरोसा दिया.

कार्यक्रम की अध्यक्षता रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद डॉ अरुण कुमार ने की. डॉ अरुण कुमार ने कहा की आज शैक्षणिक अराजकता का दौर है जिसमे शिक्षकों की प्रतिष्ठा खत्म हो गयी है. यहाँ दिल्ली में जो नौजवानों ने काम किया है उसके लिए वे इतिहास में याद किये जायेंगे.

मुजफ्फरपुर में जनता की समस्याओं पर संघर्षरत समाजवादी नेता डॉ हरेन्द्र कुमार ने कहा की सरकारों की उपेक्षा के कारण लंगट सिंह कॉलेज की प्रतिष्ठा और भवन दोनों को नुकसान हो रहा है.

वर्तमान पीढ़ी के ऊपर यह जिम्मेवारी है कि वे इसकी प्रतिष्ठा की पुनर्प्राप्ति के लिए अभियान चलाए. वर्तमान पीढ़ी को बाबू लंगट सिंह के कार्यो से अवगत होना बहुत जरूरी है. श्री कुमार ने मांग की कि कॉलेज को विश्व विरासत सूची में शामिल किया जाए.

आयकर अधिकारी अजय कुमार ने कहा की लंगट बाबू के सपनों के कारण ही आज मेरे जैसा गरीब परिवार का आदमी बड़ा अधिकारी बन सका. लंगट बाबू की ज्योति को जलाये रखना है.

ईटीवी के राष्ट्रीय संपादक अशित कुणाल ने कहा की आज दिल्ली या अन्य जगहों पर शिक्षा की बदौलत जिन लोगों ने सफलता पाई है उनका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लंगट सिंह कॉलेज से सम्बन्ध रहा ही है लेकिन आज इसकी स्थिति जर्जर है. एक बड़े आन्दोलन की जरुरत है, जो लंगट सिंह कॉलेज को इसकी खोयी प्रतिष्ठा दिला सकें.

सभा को सम्बोधित करने वालो में लंगट बाबू के पारिवारिक सदस्यों के अलावा पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय जनता युवा मोर्चा रामाशीष राय, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह “दिनकर” की पोती एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता श्रीमती उषा ठाकुर प्रमुख थे.

कार्यक्रम का आयोजन लंगट बाबू स्मृति समिति के बैनर तले किया गया. समिति के अध्यक्ष ब्रजेश कुमार ने सरकार से मांग की कि बाबू लंगट सिंह के नाम पर छात्रवृति दी जाए. लंगट सिंह कॉलेज को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाए तथा कॉलेज परिसर में स्थित प्रसिद्ध तारामंडल जीर्णोधार के लिए फंड आवंटित किया जाए.

समिति के उपाध्यक्ष और आईआईटी दिल्ली के छात्र अनुपम कुमार ने मांग की कि बिहार के विश्वविद्यालयों में बाबू लंगट सिंह चेयर की स्थापना की जाए, ताकि शैक्षणिक जागृति के अग्रदूत को श्रद्धांजलि दी जा सकें. कार्यक्रम में ऐश्वर्या सिंह, अमितेश आनन्द, अरूण कुमार, विशाल तिवारी, रणजीत कुशवाहा, प्रियेश राय आदि ने भी अपने विचार रखे. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दिल्ली में रहने वाले बिहार के लोगो ने शिरकत की.


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