Yoga: India’s Enduring Soft Power in a Changing World By Nivedita Amoli

In an era marked by rising stress, lifestyle-related diseases, and social divisions, the search for practices that promote health and harmony has become more important than ever. Among the many contributions India has made to the world, yoga stands out as a timeless tradition that continues to unite people across

पहुंच में स्कूल, लेकिन शिक्षा कोसों दूरः गुरचरन दास

प्रॉक्टर एंड गैम्बल इंडिया के पूर्व सीईओ व इंडिया अनबाऊंड के लेखक गुरचरन दास का मानना है कि सरकार के शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून की वजह से स्कूल तो छात्रों की पहुंच में आ गए लेकिन शिक्षा अभी भी उनसे कोसों दूर है.

छात्रों का स्कूल जाने का उद्देश्य मिड डे मिल खाने और निशुल्क वर्दी लेने तक ही सिमट कर रह गया है. जबकि गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करना आरटीई का मूल उद्देश्य था.

उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर
यह हो गया है कि गरीब से गरीब व्यक्ति अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना चाहता है. यहां तक कि सरकारी स्कूलों के टीचर स्वयं अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजते हैं.

वह शनिवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, एनेक्सी में आयोजित एक कॉफी टेबल बुक 'बूंदें' का विमोचन कर रहें थे.

प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अत्यंत कम शुल्क लेकर गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने वाले स्कूलों और इनसे शिक्षा प्राप्त कर सफलता के उत्कर्ष पर पहुंचने वाले व्यक्तियों की केस स्टडी पर आधारित कॉफी टेबल बुक बूंदें का संकलन थिंक टैंक, सेंटर फॉर सिविल सोसायटी द्वारा किया गया है.

विमोचन के दौरान गुरचरन दास के अतिरिक्त सीसीएस के प्रेसीडेंट व अर्थशास्त्री डा. पार्थ जे. शाह, नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन (निसा) के कुलभूषण शर्मा व दीपालया के टी.के. मैत्थ्यू आदि उपस्थित थे.

इस मौके पर डा. शाह ने कहा कि आरटीई का उद्देश्य लोगों तक शिक्षा पहुंचाना था लेकिन इसके कुछ प्रावधानों के कारण लाखों छात्रों को शिक्षा सुलभ कराने वाले स्कूलों पर ही तालाबंदी का खतरा मंडराने लगा है.

उन्होंने बताया कि देशभर में अबतक बड़ी संख्या में स्कूल बंद हो चुके हैं और बड़ी संख्या में स्कूल बंद होने वाले हैं.
कुलभूषण शर्मा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिक्षा देने की बजाए छात्रों को स्कूल पहुंचाना भर हो गया है. उन्होंने कहा कि सरकार निशुल्क शिक्षा देने की बात कहती है लेकिन केंद्रीय विद्यालय जो कि सीधे मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत आता है, वहां छात्रों से मोटी फीस वसूली जाती है. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में तमाम विसंगतियों और भ्रष्टाचार के बाबत ध्यानाकर्षण कराया.

गैरसरकारी संगठन दीपालया के टी.के. मैत्थ्यू ने बताया कि किस प्रकार गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करने की राह में स्वयं शिक्षा विभाग द्वारा रोड़े अटकाए जाते हैं.

विदित हो कि कॉफी टेबल बुक "बूंदें" में खेल, शिक्षा, राजनीति सहित तमाम क्षेत्रों की जानी मानी हस्तियों की केस स्टडी प्रस्तुत की गई है. इसमें आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, क्रिकेटर रोहित शर्मा, युसूफ पठान, सायना नेहवाल आदि की केस स्टडी शामिल है.

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