Accor to Bring Novotel to Himachal Pradesh with New Solan Hotel

Global hospitality group Accor is expanding its presence in India’s leisure travel market with the signing of Novotel Solan Kumarhatti in Himachal Pradesh. Scheduled to open in 2031, the 120-room hotel will mark Accor’s entry into the hill state. Located along the Kalka–Shimla Highway, the property is planned to cater to holidaymakers, families, wedding parties and corporate travellers.

आखिर क्यों?

जैसे ही बेटे को उसने अपनी गोदी में लिया, उसकी आँखों से आंसू झरने लगे. “अब क्यों रो रही हो, अब तो तुम माँ बन गयी हो”, नितिन ने उसे पूछा.

हां माँ, यही शब्द सुनने के लिए उसके कान तरस गए थे, माँ शब्द मिलता तो था पर कहीं तानों की तरह. कभी-कभी ये उलाहने उसके लिए इतने बड़े हो जाते थे जिनमें उसका दम घुटता था.

विकी के साथ उसका विवाह किसी स्वप्नलोक
की कहानी से कम नहीं था. सुदर्शन, एमबीए किए हुए विकी को बहुत ही जल्द एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी मिल गयी थी. वह तो उसकी ज़िंदगी में हर रीतिरिवाज़ से आई थी, हां पंडितों ने इस विवाह के लिए मना किया था. पर ये विकी की जिद्द थी, कि शादी तो उसी से करेगा. क्योंकि जब वह अपनी माँ के साथ उसे देखने आया था तभी वह उसकी ख़ूबसूरती पर फिदा हो गया था.

पंडितों ने मना किया पर इतने सुदर्शन लड़के को छोड़ने का मोह उसके पिता त्याग न सके और हर सलाह को ताक पर रखकर उसका विवाह हो गया. ससुराल में उसने वैभव और विलासिता का वह नंगा नाच देखा जो उसने अपने मध्यवर्गीय घर में नहीं देखा था.

हीरे के हार, हीरे के कंगन और वह हर वस्तु जो उसकी ख़ूबसूरती में चार चाँद लगाती थी, मुम्बई में पॉश इलाके में फ्लैट. सब कुछ जैसे एक परीकथा की तरह चल रहा था. धीरे- धीरे एक साल बीता, अब तक लोग उसे खुशखबरी के बारे में पूछने लगे. पहले तो वह टाल जाती पर उसे अहसास हो रहा था समय के जाने का.

ऐसे ही दो साल और बीत गए, अब हीरे के गहने उसे काटने लगे थे, विकी की छुअन उसे अजीब लगने लगती थी. उसने अपनी जांच करा ली थी और उसमें कोई कमी नहीं थी, पर घर और समाज तो उसे ही तानों से छेड़ता रहता था. अब तो सास और माँ की तरफ से भी पुकार आने लगी थी.

उसका गोरा रंग भी ताम्बई होता जा रहा था, आखिर जब उससे एक दिन रहा नहीं गया तो उसने विकी से जांच कराने के लिए कहा, उसने लापरवाही से कहा
“हो जाएगा, यार बच्चा, क्या जल्दी है?”
“नहीं विकी, तुम समझ नहीं रहे हो”
“क्या नहीं समझ रहा हूँ मैं, जब बच्चा होना होगा हो जाएगा, तुम टेंशन न लो, बाय, अगर तुम ज्यादा परेशान होगी तो हम इण्डिया से बाहर चले चलेंगे. ओके”

उसने हामी तो भर दी पर उसके मन में गाँठ पड़ गयी. उसके इस अनमने मन से  परेशान होकर विकी ने कंपनी से अमेरिका में जाने की मांग की. आखिर कंपनी ने दो महीने बाद उसे अमेरिका बुला लिया.

वह भी आधी-अधूरी सी तानों में घिरी सात समुन्दर पार चली गयी. और महीने बीते, उसने भी वहां पर नौकरी ज्वाइन कर ली, अवसाद से घिरे मन में वह अपने आप से बातें करती, अपने आप से ही लड़ती, और कुछ न करती.

विकी के जांच न कराने के कारण उसका मन बहुत दुखी था, बार-बार कहती “यहाँ पर तो हमें कोई जानता नहीं है, कम से कम यहाँ पर तो जांच करा लो, देखो जो भी कमी होगी उसे यहाँ के डॉ. सही कर देंगे और फिर हम एक सुखी जीवन जी सकते हैं.”

विकी टाल जाता. आखिर इस रात की सुबह कब होगी वह यही सोचती, माँ को बताती तो बेचारी मध्यवर्गीय माँ क्या करती, पिता से खुल कर बात न कर पाती.

वह सोचती कितना मुश्किल होता है एक पुरुष को यह साबित करना कि वह पिता बनने के योग्य नहीं है. कोई भी व्यक्ति इस बात पर यकीन नहीं करेगा कि उसका सुदर्शन पति, जिसे पाने के लिए लड़कियों की लाइन लगी थी, वह बच्चा पैदा करने में नाकाम है. और विकी, उसे अपनी कमजोरी का अहसास तब हुआ था जब उसने डॉ. से जांच कराई थी और उसे यह पता चला था कि वह ही पिता बनने के लायक नहीं है.

वह भारत में माँ और पिता का सामना नहीं कर पा रहा था, इसलिए वह यहाँ पर चला आया, अपना खूंटा ही जैसे वहां से हटा लिया था. पर यहाँ पर भी वह सुखी नहीं था, उसे हर समय अपनी पत्नी की निरीह आँखों से एक सवाल टपकता हुआ दिखाई देता “आखिर क्यों”. पर क्या करे वह, अपना पुरुषवादी अहं भी छोड़ नहीं पा रहा था, और अपनी पत्नी का सामना कर पा नहीं पा रहा था.

क्या करे वह, कभी कभी वह अँधेरे कोने में डूब जाता और अपनी इस कमजोरी को छिपाने के लिए वह हिंसक हो उठा, जबरन उसके कपडे उतारता, हिंसा से उसे देखता और अपनी कमजोरी को उसके कोमल बदन को मसलने के बाद पूरा समझता. वह भी कुछ भी न कहती और टुकुर-टुकुर उन लम्हों में छत को ताका करती.

अपनी किस्मत से लड़ने की हिम्मत नहीं थी उसमें. पर ऐसे ही ज़िंदगी तो न बीतेगी, कुछ तो करना ही होगा, ऐसे ही एक दिन उसने भारत आने का मन बनाया. विकी ने पूछा नहीं, और उसने कारण बताया नहीं, पर विकी की आँखों में एक मौन मनुहार थी, जिसे इस बार उसने अनसुना कर दिया.

जैसे नदी जब-तक शांत है तब-तक ही केवल शांत है, उसके बाद वह जब कुपित होकर रास्ता बदलती है तो सबको तहस-नहस करती चली जाती है. ऐसे ही उसका मौन किसी बड़ी विभीषिका की चेतावनी दे रहा था.

विकी को इस बात का पता था, तभी उसके जाते ही उसने अपने वकील से बात करके तलाक का नोटिस भेज दिया. उसे तो तसल्ली हुई पर उसके माँ बाप पर जैसे आसमान टूट पड़ा, क्योंकि उसकी सास ने उस पर चरित्रहीनता का आरोप लगाया था, हालांकि उसका मन नहीं था, कुछ भी कारण बताने का पर अपने माता-पिता को असहाय देखकर उसे बहुत गुस्सा आया और उसने पारिवारिक कोर्ट में सब कुछ बताने का निर्णय लिया.

इतने बरसों की पीड़ा जैसे तिरोहित हो कर बह चली थी. उसने अपने परिवार को इस अपमान से बचाने के लिए सच्चाई बताने का निर्णय लिया, और अपनी डॉ की रिपोर्ट भी ले ली, क्योंकि उसके ससुराल वालों ने उसे बाँझ और चरित्रहीन बता कर तलाक माँगा था. पर विकी की ओर से न्यायालय से बाहर मामला सुलझाने का अनुरोध और उस पर लगे हर आरोप वापस लेने का अनुरोध आया.

उसने भी जैसे मान लिया उसका अनुरोध. न उसे किसी क्षतिपूर्ति की मांग थी और न ही किसी पैसे की, पर उसके घरवालों ने उसकी पीड़ा के एक-एक लम्हें का मोल माँगा. विकी ने हर शर्त को सिर झुका कर स्वीकार किया. विकी की ओर से चरित्रहीनता का आरोप वापस लिया गया और आपसी सहमति से तलाक लिया गया.

अब उसे जीने की तमन्ना नहीं रही थी, पर जीवन ऐसे नहीं कटता. धीरे-धीरे हर घाव भर जाता है, उसकी आत्मा पर लगा हर घाव उसे जीने नहीं दे रहा था, ऐसे में नितिन का आगमन उसके जीवन में हुआ, ऐसा लगा जैसे उसकी जलती हुई रूह पर किसी ने अपने नेह का फवा रख दिया हो.
नितिन को उसके बारे में सब कुछ पता था. हालांकि उसका मन नहीं था पर जब नितिन ने अपने प्रेम और विवाह का प्रस्ताव उसके सम्मुख रखा तो वह मना कर पाई. न जाने उस पल में क्या था कि उसकी आँखों से सारी पीड़ा बह चली, उस एक ही क्षण में उसके सारे घावों पर मलहम लग गयी.

वह तो एक कली थी, जिसे पुष्प बनाने में विकी नाकाम रहा था. न जाने क्या हो गया कि वह पिघल गयी, और एक लता सी अपने नितिन में समा गयी.

और आज एक वर्ष उपरान्त वह अपने ही अंश के साथ इस बिस्तर पर थी, पूर्णता का अहसास लिए, अपने और नितिन के अंश के साथ. वह आज पूर्ण हुई थी, बार-बार उसे ताकती या नितिन को ताकती, नितिन ने उसका माथा चूमते हुए कहा “अरे, भरोसा कर लो, ये तुम्हारा ही अंश है”
“आज मैं पूर्ण हुई, नितिन”
“तुम अधूरी ही कब थी, तुम तो खुद में हमेशा ही पूरी थी, अधूरे तो हम लोग होते हैं, तुम ही तो हमें जीवन का अहसास देती हो”
“नहीं, हम दोनों ही मिलकर नई दुनिया का निर्माण करते हैं”
“अरे हां, तुम्हारी माँ कल आएंगी, और एक बात और पिछले महीने विकी की शादी हो गयी”
“एक और मैं – तैयार होगी, एक दिन, एक दिन उसकी ये कमजोरी उसे ही नष्ट करेगी ये नहीं समझ रहा है, खैर मुझे क्या”
उसने अपने बेटे को चूमा और विकी का पूरा अध्याय आज कहीं मन के तहखाने में हमेशा के लिए दफन कर दिया.

-सोनाली मिश्रा


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