आखिर सिक्के के दो पहलू क्यों?

आखिर सिक्के के दो पहलू क्यों?
सिक्के के एक तरफ एक चेहरा,
तो दूसरे तरफ दूसरा क्यों?
आखिर सिक्के के दो पहलू क्यों?


जब चोर चुराए उसको तो लगता काला,
जब कोई कमाए उसी को तो कहलाता सफेद.
जब कोई दो पैसे में भी रहे सुख से,
तो वही लगे अमृत.
जब कोई दस में भी रो-रोकर रहे,
तो वही बने विष.

आखिर सिक्के के दो पहलू क्यों?
जब कोई प्यार से दे तो आशीर्वाद,
वही जब लड़कर ले तो अभिशाप.
कोई परिवार के लिए कमाए,
तो कोई घर ही तोड़ गिराए.
सिक्का तो वही...
फिर आखिर उसी सिक्के के दो पहलू क्यों?


-सोनाली चौधरी

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