चंद्रकांत शुक्ल की दो कविताएं

1. तुम्हारे बिन जो ये एक साल गुज़रा है,
क्या बताऊँ मुझ पे क्या क्या गुज़रा है..
जैसे शाखों से पत्ते टूटे,जैसे कृष्ण से बंसी छूटे
लहरों ने उछलना छोड़ दिया, नदिया ने समंदर में मिलना
छोड़ दिया
चिड़ियों ने चहकना छोड़ दिया, फूलों ने महकना छोड़ दिया
तितली ने इतराना छोड़ दिया,भंवरों ने मंडराना छोड़ दिया
रूप ने श्रृंगार को छोड़ा, काव्य ने अलंकार को छोड़ा
आईने ने दीदार को छोड़ा, बनिए ने व्यापार को छोड़ा
आकाश ने गरजना छोड़ा, बिजली ने कड़कना छोड़ा
सूरज ने जैसे उगना छोड़ा,बादल ने जैसे बरसना छोड़ा
सितारों ने चमकना छोड़ा, चाँद ने अभिमान को छोड़ा
किसी ने अधूरे व्रत को तोड़ा, यौवन ने फिर सजना छोड़ा
कंगन ने खनकना छोड़ा, पायल ने झंकार को छोड़ा
बिंदिया ने दमकना छोड़ दिया,आँचल ने सरकना छोड़ दिया
होली ने जैसे फाग को छोड़ा,दीवाली ने आग को छोड़ा
कविता ने जैसे कवि को छोड़ा,गायक ने अपने राग को छोड़ा
शायर ने ग़ज़ल को छोड़ दिया,खेतों ने फ़सल को छोड़ दिया
तालाब ने कमल को छोड़ा,मछली ने जैसे जल को छोड़ा

बस वैसे ही तुमने छोड़ दिया,सपनों का घरौंदा तोड़ दिया...

2. बेटी बचाओ... बेटी पढ़ाओ...

वो जो बेटी घर आँगन को महकाती है,
जिसकी पायल की छन छन कोई धुन सुनाती है...
जब शादी करके पीहर को वो तज जाती है
अपनी सारी दुनिया अंजानो के बीच बसाती है
जब बेटी एक बहू एक पत्नी एक भाभी का फ़र्ज़ निभाती है
जब नन्ही बिटिया गृहलक्ष्मी एक गृहणी बन जाती है...
जब वो बिटिया खुद माँ बन जाती है...
9 माह तक शिशु के आगमन में लाखों सपने सजाती है
फिर माँ बन कर अपनी बिटिया को दुलराती है
रात भर जागकर सारे सुख ताक पर
खुद गीले में सोकर बिटिया का बिछौना लगाती है
क्या आसान है माँ बन जाना, बिटिया से माँ बनने का सफ़र
क्या क्या दंश किन किन कष्टों का सफ़र है माँ बन जाना
बिटिया की एक हंसी सब सुखों से बड़ी हो गयी
बिटिया की आँखों में ही अपना संसार बनाती है
एक बिटिया जब खुद माँ बन जाती है
और वो ही बिटिया जब माँ को छोड़ बिदा हो जाती है... वो भी यूँ ही अपना फ़र्ज़ निभाती है..

-चंद्रकांत शुक्ल 

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

About Us

Successful AI Will Be Simply a Part of Life- By TM Roh, President and CEO of Samsung Electronics

Tech Mahindra Joins Hands with AMD to Drive Next-Gen Hybrid Multi-Cloud Transformation for Global Enterprises